जब हमारे पुण्य का उदय होता है, तब भागवत कथा श्रवण करने का अवसर मिलता है- पं. जितेंद्र महाराज





देवास। मोती बंगला प्रताप गार्डन में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। कथा का मंगलवार को द्वितीय दिवस था। कथा के द्वितीय दिवस व्यासपीठ सये अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु आचार्य पं. जितेंद्र महाराज ने कहा कि भगवान की कृपा से हम श्रीमद् भागवत कथा में आकर बैठे हैं। श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने से कई जन्मों के पाप मिट जाते हैं। जब हमारे पुण्य का उदय होता है, तब भागवत कथा श्रवण करने का अवसर मिलता है। भागवत अर्थात भ से भक्ति ग से ज्ञान व से वैराग्यता त से तपस्या। इन चार शब्दों को समझना पड़ता है। जो भगवान की लीलाओं को समझ जाता है उसे परमात्मा मिल जाता है। पं. रमेश व्यास ने बताया कि व्यासपीठ की आरती मुख्य अतिथि कैलाश डागा, पत्रकार अनिल राज सिंह सिकरवार, दिनेश भूतडा, अमित तिवारी, कमलेश पाठक, प्रकाश भूतडा, शिवाजी माहेश्वरी, मनोज हेतावल, राजकमल जोशी, भगवान सिंह चावडा, विपिन रघुवंशी, पं. रोहित उपाध्याय सहित भक्तों ने की। पंडित जी ने आगे कहा कि जीवन में पहले गुरु बनाना चाहिए। जिसने गुरु नहीं बनाया उसका कल्याण नहीं होगा। उन्होंने कहा, कि कानों की शोभा कुंडल से नहीं होती है। जो कथा नहीं सुनता, उसके कान नागों के बिल के समान होते हैं।  भगवान के ऊपर हमें भी विश्वास होना चाहिए। अगर विश्वास है भगवान मिलता है। तुम दुनिया को रिझाने में लगे हो इसलिए तुम्हें परमात्मा नहीं मिलता। ज्ञान गंगा का कोई पार नहीं है। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक होगी।

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