परमार्थ व धर्म के कार्य में धन खर्च करने वाला पुण्यात्मा होता है- पं. जितेंद्र महाराज
पं. जितेंद्र महाराज ने कहा, कि किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए हवन में आहुतियां डालना आवश्यक हैं। बिना हवन के कोई भी धार्मिक अनुष्ठान परिपूर्ण नहीं होता है। यज्ञ-हवन में डाली गई आहुतियां संपूर्ण ब्रह्मांड में देवी-देवताओं तक पहुंच जाती है। व्यास परिवार द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन कर धर्म के मार्ग में अनुकरणीय कार्य किया है। सभी धर्मप्रेमी मातृशक्ति इसी तरह सनातन धर्म ध्वजा को लहराते रहे। धर्म के कार्य में, धर्म के मार्ग में लगाया गया धन कभी व्यर्थ नहीं जाता है।
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उन्होंने कहा कि अपने लिए तो सब धन खर्च करते हैं लेकिन जो परमार्थ में धन खर्च करते हैं, धर्म के कार्य में धन खर्च करते हो ऐसे मानव पुण्यात्मा होते हैं। पुण्य आत्माओं और भाग्यशालियों को ही सेवा का और पुण्य कार्य करने का अवसर मिलता है। इस दौरान भंडारे में सैकड़ों धर्मप्रेमियों ने महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ लिया। आयोजक मंडल की विनोदिनी रमेश व्यास ने सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के सफल आयोजन में अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करने वाले परमानंद द्विवेदी, राजकमल जोशी, निरंजन कानूनगो, विक्रम सातपुते, आनंद चौहान, संजय गोयल, सुधीर गोयल, अनुराग बाजपेयी, हेमंत शर्मा, संतोष दुबे, पिंटू नाथ सहित सभी सहयोगियों माता-बहनों का आभार व्यक्त किया। संचालन भगवानसिंह चावड़ा ने किया।
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