जब काल आएगा तो परमात्मा के अलावा कोई बचाने नहीं आएगा- शांतिस्वरूपानंद गिरि जी
देवास। जिसका लक्ष्य प्रबल होता है, उसे परमात्मा अवश्य मिलते हैं। जैसे कुम्हार मटके को ठोक बजाकर देखता है, पकाने के बाद कि इसमें कोई कमी तो नहीं रह गई हो। ऐसे ही परमात्मा हमें ठोक बजाकर परीक्षा लेता है, कि मेरा भक्त सच्चा है या नहीं। मेरे भक्त में भाव भी है या नहीं। गोविंद उन्हें ही प्राप्त होते हैं जो निष्कपट हो। उक्त उदगार श्री गुरू टेकचंद जी दामोदर वंशीय दर्जी धर्मशाला मोतीबंगला में मुख्य यजमान मीना महेश चौहान द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के तृतीय दिवस श्री स्वामी शांतिस्वरूपानंद गिरि जी महाराज ने कहे। उन्होंने कहा कि जब काल आएगा तो परमात्मा के अलावा कोई बचाने नहीं आएगा। जितने भी नाते-रिश्ते हैं सब झूठ है, इसलिए उठते बैठते, जागते-सोते परमात्मा की भक्ति करते रहे।
गहरी नींद में भी परमात्मा को पुकार लेना, वह गले से लगा लेगा। उन्होंने कहा कि हम अपने बच्चे, माता-पिता, पत्नी, रिश्तेदार की तो प्रतीक्षा करते हैं, कि कब आएगा आने वाला है, लेकिन परमात्मा की प्रतीक्षा नहीं करते। सांसारिक नाते-रिश्ते के साथ-साथ अगर हम परमात्मा की प्रतीक्षा करें, उससे नाता जोड़ ले तो 84 लाख योनियों के भटकाव से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। जोड़ना ही है तो परमात्मा से रिश्ता जोड़ लीजिए। परमात्मा से रिश्ता कभी नहीं टूटेगा। व्यासपीठ की आरती परिवारजनों एवं समाजजनों ने किया। कथा 3 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1 से सायं 5 बजे तक चलेगी। कथा की पूर्णाहुति महाआरती एवं प्रसादी वितरण के साथ होगी। चौहान परिवार ने नगर के समस्त भक्तों से अधिक सें अधिक संख्या में कथा श्रवण कर धर्मलाभ लेने की अपील की है।