रतलाम के कोरोना योद्धा पति को उनकी पत्नी ज्योति पाटीदार ने किया सलाम
कोरोना महायुद्ध विशेष :
रतलाम : अक्सर जैसे ही शाम ढलती है और रात का अंधेरा हावी होने लगता है देश के अधिकांश घरों में रात का भोजन खत्म कर कोई सोने की तैयारी करता है या कोई मनोरंजन के लिए टी.वी. देखते है तभी देश के एक कोने में एक कर्मवीर का सवेरा होता है वो रात ढलते ही अपनी ड्यूटी पर जाने की तैयारी करता है की ताकि उसका देश सुरक्षित रहे ताकि उसके देश के लोग सुरक्षित रहे!!
रात होते ही वह स्नान करता है फिर खाना खत्म कर अपनी ड्यूटी के लिए ड्रेस पहनता है और अलविदा लेता है एक माँ से , एक पत्नी से, एक बहन से ,और 8 दिन के उसके पहले बेटे से जिससे वो अभी ठीक से मिल भी नहीं पाया ,जो अभी यह भी नहीं जानता कि पिता क्या चीज़ होती है !
सभी लोग टकटकी लगये हुए निहारते रहते है और मन में एक ही भाव की किसी तरह हम रोक ले! परन्तु देश के फ़र्ज के आगे कोई कुछ कह नही पाता!! जहां लोग इस बीमारी से डर के घर में बैठे हुए है ,वहीं यह बेटा बीमारी के बीच चल देता है! माँ को एक ही चिंता सताती है कही मेरा एकलौता बेटा किसी का इलाज करते हुए खुद बीमार ना हो जाये!! पर माँ, पत्नी ,बहन सभी तो ढाढस बंधाते हुए कि मुझे कुछ नही होगा और अपने आप को भी विश्वास दिलाते हुए कि एक दिन हम कोरोना की यह जंग जरूर जीतेंगे और अपना कर्म करने में कभी संकोच नहीं करेंगे जो अपने जान की परवाह किये बिना ही अपने देश और उन लाखो लोगो की आश बनकर घर से निकल पड़ता है उन सुनी पड़ी गलियों से होते हुए कर्म करने ,तभी वह कर्मवीर कहलाया है!!
कुछ ऐसी ही कहानी है इस कर्मवीर की जो म. प्र. के रतलाम जिले के एक छोटे से गांव हनुमंतिया में रहता है जिसे डॉ चेतन कुमार पाटीदार के नाम से जानते है जिनके पिता श्री मांगीलाल पाटीदार और माता गुद्दी (guddi) पाटीदार कृषक है! पर कहते है ना कर्मवीरो की धरती जगह नहीं देखती कि क्या गाँव या शहर बस ऐसा ही कुछ!! अपनी प्राथमिक पढ़ाई गांव से पूरा करके वह म.प्र. के प्रतिष्ठित महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर से पढ़ाई पूरी करने के बाद अभी सीनियर रेजिडेंट एनैस्थिसिआ के रूप में महाराजा यशवंतराव होलकर अस्पताल में कार्यरत है कोरोना के विश्व्यापी बीमारी से अपने देश को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है जहां पूरा विश्व ये मान चूका है की एनैस्थिसिआ i c u वाले इस वैश्विक महामारी में frontline warriors है और जिन्हे बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा 80% है, रात भर कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज और उनकी सेवा करना ही इनका मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य है पूरी रात गंभीर मरीजों का इलाज करते वक्त काफी निराशा भी होती है की हमारा समाज देश ऐसी भयावह बीमारी के आगोश में कैसे आ गया परन्तु मरीजो का उत्साह बढ़ाकर इलाज के द्वारा हो रहे सुधार और अच्छे परिणाम बताकर उनका हौसला बढ़ाया जाता है ! खुद भले ही PPE किट से पसीने में तर रात भर बिना थके, रात भर बिना पानी पिए- वाशरूम गये लगातार 12 घंटे तक ,इसी उम्मीद में की सुबह सा सवेरा फिर से जगमगायेगा , एक दिन आशा की किरण दस्तक जरूर देगी जो इस अंधकार को हमेशा के लिए खत्म कर देगी और इन कर्मवीरो की थकान जब ही कम होगी !
एक दिन अपने साथियों के पास n95 मास्क की कमी को देखते हुए अपने स्वयं और समाज के अन्य साथियों को मिलाकर अस्पताल में कोरोना से लड़ रहे अन्य मेडिकल स्टाफ को 65000 रूपये का अनुदान अस्पताल में किया!!
ऐसे कर्मवीरो के लिए हम और कुछ ज्यादा नही कर सकते बस एक छोटे से प्रायश से इनका उत्साह और हौसला बढ़ाये ताकि ये देश की मिट्टी के लिए काम आ सके !
अपने लोगो के लिए छोटे से घर में एक कोने में एक जेल में रह रहे कैदी की तरह जीवन व्यापन कर रहे है घर की किसी चीज़ को ना छूकर ताकि उनका घर, घर के सदस्य और एक नन्हा सा छोटा मेहमान सुरक्षित रहे और साथ ही उनके पडोसी भी सुरक्षित रहे!!
ऐसे कर्मंवीरो देश के लोगो का और सभी पत्रकार बंधुओ का नमन ,प्रणाम ,सलाम!!
एक पत्नी की कलम से
ज्योति पाटीदार