लॉकडाउन के बीच पाटीदार समाज के युवाओं में एक बार फिर उठी मांग, जानिए पूरा मामला

मध्यप्रदेश : पाटीदार विकास दर्पण सदैव अपनी जागरूकता एवं कुरीतियों पर प्रहार के लिए म.प्र पाटीदार समाज में चर्चा का विषय रहा है। कई लोगो ने अपनी रूढ़िवादी सोच के कारण विरोध भी किया, लेकिन पाटीदार विकास दर्पण सदैव अपने इरादों पर अटल है।
मृत्युभोज को समाज के लिए बड़ी महामारी बताना कभी कभी विवादित भी रहा है क्योंकि आज के समय मे भी कुछ समाजजन ऐसे है जो अपनी झूठी शान के लिए समाज मे कई प्रकार की कुरीतियों को जन्म देते है और फिर इसका खामियाजा समाज के अन्य परिवारों को भुगतना पड़ता है।


पाटीदार विकास दर्पण के सह संपादक अंकित बड़िया(पाटीदार) ने भी 2018 में अपनी दादीमाँ की मृत्यु के पश्चात तीसरे अर्थात उठावने को ही अंतिम कार्य करते हुए मृत्युभोज के खिलाफ पाटीदार विकास दर्पण की मुहिम को बल दिया था। इसके बाद समाज के कई लोगो ने उनके इस कदम की प्रशंसा की थी।



आज कोरोना महामारी के इस समय मे एक बार फिर युवा पीढ़ी में मृत्युभोज जैसी सामाजिक महामारी को समाप्त करने के लिए सोशल मीडिया पर जंग छेड़ दी है। आज कर्फ्यू की स्थिति में देशभर में किसी भी प्रकार के आयोजन पर रोक लगी हुई है। ऐसे में किसी परिवारजन की मृत्यु हो जाने पर भी किसी प्रकार के कोई भोज का आयोजन नही किया जा रहा है। पवित्र गरुड़ पुराण में भी एक वृतांत आता है जहाँ मृतक के घर का भोज करने से पाप लगना बताया है। अगर इस बात की पुष्टि होती है तो यह सिद्ध होता है कि मृत्यभोज केवल समाज के रूढ़िवादी लोगो के दिमाग की उपज है। इसे बंद किया जाना चाहिए। मृतक की आत्मशुद्धि के लिए घर मे पूजा-पाठ कर एवं 11 ब्राम्हणों को भोज करवाने तक ही सीमित किया जाना चाहिए। जो भी सक्षम समाजजन है उन्हें अपने परिवारजन की स्मृति में समाज के जनसेवा करने वाले प्रतिष्ठानों में दान किया जाना चाहिए। इस प्रकार की पहल से मृत्युभोज का भार जिन परिवारों पर कर्ज बढ़ाता है उन्हें आर्थिक एवं मानसिक रूप से बहुत राहत प्राप्त होगी।


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