पाटीदार विकास दर्पण, उज्जैन । मोक्षदायिनी माँ क्षिप्रा के तट पर स्थित श्री मालवा कुल्मी पाटीदार श्रीराम मंदिर स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर स्वर्ण जयंती महोत्सव का प्रारंभ आज रामघाट से निकली ऐतिहासिक भव्य कलश यात्रा के साथ ही 30 नवम्बर से 6 दिसम्बर तक 7 दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। जिसमें 11 कुण्डीय यज्ञ के साथ अन्य धार्मिक आयोजन सम्पन्न होंगे। रविवार प्रातः 8 बजे रामघाट से प्रारंभ हुई दो किलोमीटर लम्बी भव्य ऐतिहासिक कलश यात्रा नगर के प्रमुख मागों से निकली जिसमें श्री 1008 राष्ट्रीय संत अवधूत नर्मदानन्द बापजी (श्री श्री नजर निहाल आश्रम ऑकारेश्वर ज्योतिर्लिंग खण्डवा), श्री श्री 1008 सन्त श्री महामंडलेश्वर सीतारामदासजी महाराज (आवरी माता, झड़ोल आश्रम (राजस्थान), श्री श्री 1008 महामण्डेलश्वर साध्वी आत्मचेतना गिरिजी महाराज गुफा बाला शिव मंदिर गुरुग्राम हरियाणा बग्गी में सवार होकर कलश यात्रा में आशीर्वाद प्रदान कर रहे थे। कलश यात्रा में लगभग 5 हजार महिला-पुरुषों ने भाग लिया जिसमें लगभग 3 हजार माता-बहिनें सिर पर कलश एवं श्रीफल धारण कर चल रही थी। कलश यात्रा का अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा...
शादी एक ऐसा अवसर है, जो जीवन में खुशियां और नए रिश्ते लेकर आता है। इस अवसर पर मिलने वाले उपहार भावनात्मक और आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन इन उपहारों पर आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधान लागू हो सकते हैं। यदि आप इनसे संबंधित नियमों को समझ लें, तो यह आपको उचित कर नियोजन और अनुपालन में मदद करेगा। यदि आयकर के इन नियमों का पालन नही किया गया तो आयकर विभाग इसके संबंध में आपसे पूछताछ भी कर सकता है। ऐसी परिस्थिति में एक फाईनेंशियल एक्सपर्ट ही आपको बेहतर सलाह दे सकते हैं। आईये जानते है क्या कहते हैं सीए विपिन पाटीदार.... शादी के अवसर पर उपहारों पर आयकर छूट आयकर अधिनियम की धारा 56 (2) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को किसी वित्तीय वर्ष में 50,000 रुपये से अधिक मूल्य का उपहार प्राप्त होता है, तो यह कर योग्य माना जाता है। लेकिन शादी के अवसर पर उपहार इस नियम के अंतर्गत नहीं आते। इस अवसर पर वर-वधू को मिलने वाले उपहार, चाहे वह नकद, आभूषण, वाहन, संपत्ति, या अन्य किसी रूप में हों, कर से पूरी तरह मुक्त होते हैं। इस छूट पर कोई ऊपरी सीमा लागू नहीं होती। रिश्तेदारों से उपहार पर छूट शादी के अवसर...
गौरव हिंदुस्तान का : छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज जिसके नाम से थर्राते थे मुग़ल। हिन्दुस्थान में हिंदवी स्वराज एवं हिन्दू पातशाही की गौरवपूर्ण स्थापना करने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन को यदि चार पंक्तियों में संजोया जाए तो यही कहा जाएगा कि :- 🚩'देश धरम पर मिटने वाला, शेर शिवा का छावा था। 🚩महा पराक्रमी परम प्रतापी, एक ही शंभू राजा था।। संभाजी महाराज का जीवन एवं उनकी वीरता ऐसी थी कि उनका नाम लेते ही औरंगजेब के साथ तमाम मुगल सेना थर्राने लगती थी। संभाजी के घोड़े की टाप सुनते ही मुगल सैनिकों के हाथों से अस्त्र-शस्त्र छूटकर गिरने लगते थे। यही कारण था कि छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद भी संभाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज को अक्षुण्ण रखा था। वैसे शूरता-वीरता के साथ निडरता का वरदान भी संभाजी को अपने पिता शिवाजी महाराज से मानों विरासत में प्राप्त हुआ था। राजपूत वीर राजा जयसिंह के कहने पर, उन पर भरोसा रखते हुए जब छत्रपति शिवाजी औरंगजेब से मिलने आगरा पहुंचे थे तो दूरदृष्टि रखते हुए वे अपने पुत्र संभाजी ...