मनुष्य अगर चाहे तो कुछ भी बन सकता है।
प्रेरणादायक : संसार के प्रत्येक मनुष्य के अंदर कोई ना कोई गुण विशेषता क्षमता कल आया प्रतिभा अवश्य होती है लेकिन हर एक व्यक्ति को उसकी पहचान नहीं होती अपने अंदर छुपी हुई प्रतिभा को उजागर करना तथा उसका विकास करना भी एक कला है और यह कला संसार की सारी कलाओं में श्रेष्ठ है। प्रतिभा किसी भी कलाकार या साधक के कौशल का बीज है। आचार्य भट्ट तोत के अनुसार प्रज्ञा नवननोनमेषशालिनी प्रतिभा माल अर्थात नए-नए भाव और विचारों के उनमें से युक्त प्रज्ञा को प्रतिभा कहते हैं। अक्सर कहा जाता है मनुष्य में प्रतिभाएं जन्मजात से होती है अर्थात पूर्व जन्मों के अच्छे कर्मों के परिणाम स्वरूप प्राप्त होती है प्रतिभा का क्षेत्र व्यापक होकर खेल संगीत चित्रकला विज्ञान वास्तु कला भाषण वाद विवाद कला इत्यादि क्षेत्रों में समाहित हो सकती है। जन्म ज्ञान प्रतिभाओं का विकास एवं परीष कार व्यक्ति को अपने जीवन में ही अभ्यास द्वारा करना होता है समझदार माता पिता अपने बच्चों की प्रतिभा को ठीक ढंग से पहचानते हैं तथा उनके विकसित होने का अवसर प्रदान करते हैं लेकिन अन्य अपने बच्चों की प्रतिभा एवं रुचि से भिन्न मेडिकल इंजीनियरिंग शा...