पाटीदार दंपति ने समाज मे पेश की एक मिसाल
श्री विष्णु पाटीदार, इंदौर महानगर
अनुकरणीय कार्य : विष्णु जी से प्राप्त जानकारी के अनुसार।
हमने हमारे घर की छत पर १२ साल पहले २ वर्मी काम्पोस्ट युनिट बनाएँ है, पहले युनिट (गड्डे) में घर का सारा ग्रीन (गीला) कचरा (फलों, सब्जियों के छिलके, सूखे पत्ते, घासफुस, चाय पत्ती, फलपत्ती, गार्डन वेस्ट, कुवाँरपाटा , गोबर आदि सडने वाली चीजें) डालते जाते हैं, जब कचरा सड़ जाता है तब हम उसमें केचूऐ डाल देते हैं , उपर से टाट की खाली बोरा या पराली (घास पुस) डालकर पानी डालते रहते हैं, हजारों केचुए कचरे को 3 से 4 माह में 250 से 300 किलो बहुमूल्य गुणाकारी वर्मी काम्पोस्ट (खाद) में परिवर्तित कर देते हैं। इसी प्रकार दूसरे युनिट (गड्डे ) मे कचरा कुछ मिट्टी डालते रहते हैं जब ये भी भर जाता है और सढ जाता है तब पहली यूनिट के खाद को छान कर खाली कर देते हैं और केचुऔ को दूसरी यूनिट मे डाल देते हैं जो फिर इसे भी खाद बना देते है। यूनिट के तले (बाटम) में पाईप डालें हैं जिसमें से अतिरिक्त पानी के साथ वर्मिवास निकलता हैं। जिसे सब्जियों पर कीटनाशक के तरह इस्तेमाल करते हैं, ऐसा हम लगभग 12 साल से कर रहे हैं।
इसी खाद से घर की छत पर ही सालभर ऋतु अनुसार (वर्षाकाल मे चवला, गिलकी, लौकी, करेला एवं ठंड में गोभी, गाजर, मूली, बटला पालक, मैथी और गर्मी में ककड़ी, करेला, पत्तागोभी, टेन्सी आदि) सब्जियों की खेती करते हैं।
कीटनाशक के रूप में छाछ, गोमूत्र, गोबर, मिर्चि, लसन, तम्बाकू, धतुरा, नीम, कनेर, अरन्डी, करन्ज आदि से बनाएँ गए घरेलू उत्पाद, नीम तेल और बाजार के जैविक कीटनाशक का प्रयोग करते हैं।